सूर्य ग्रहण 21 सितम्बर 2025 साल का आखिरी सूर्य ग्रहण है। यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जो भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और अंटार्कटिका जैसे देशों से साफ़ तौर पर देखा जा सकेगा। इस खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा सूर्य का एक हिस्सा ढक देगा, जिससे सूर्य ऐसे दिखेगा जैसे उसमें से कोई टुकड़ा काट लिया गया हो।
कब और कहाँ दिखाई देगा?
- यह ग्रहण 21 सितम्बर 2025 को हो रहा है।
- भारत में यह दिखाई नहीं देगा, क्योंकि यहाँ सूर्यास्त हो चुका होगा।
- यह मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, अंटार्कटिका और दक्षिण प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों से देखा जा सकेगा।
- वहाँ के स्थानीय समय के अनुसार यह सुबह के समय शुरू होकर कुछ घंटों तक चलेगा।
ग्रहण की अवस्थाएँ
- पहला संपर्क – जब चंद्रमा सूर्य की डिस्क पर आना शुरू करता है।
- मध्य चरण – जब सूर्य का बड़ा हिस्सा ढक जाता है और “काटे हुए” जैसा दिखता है।
- अधिकतम ग्रहण – जब चंद्रमा सूर्य को सबसे ज़्यादा ढक लेता है।
- अंतिम चरण – जब चंद्रमा धीरे-धीरे हट जाता है और सूर्य फिर से पूरा दिखने लगता है।
क्यों है यह ख़ास?
- यह साल 2025 का आख़िरी सूर्य ग्रहण है।
- भले ही आंशिक है, लेकिन जिन क्षेत्रों से यह दिखेगा वहाँ नज़ारा बेहद रोमांचक होगा।
- भारत में यह नज़र नहीं आएगा, इसलिए सूतक काल (Sutak Kaal) लागू नहीं होगा।
सुरक्षित रूप से कैसे देखें?
सूर्य ग्रहण को देखना बेहद रोमांचक होता है, लेकिन यह खतरनाक भी हो सकता है अगर सावधानी न बरती जाए।
- साधारण धूप का चश्मा पर्याप्त नहीं है। केवल ISO 12312-2 प्रमाणित “Eclipse Glasses” का उपयोग करें।
- दूरबीन या कैमरे से देखने पर सोलर फिल्टर ज़रूरी है।
- सबसे सुरक्षित तरीका है पिनहोल प्रोजेक्टर या अप्रत्यक्ष विधि से देखना।
- साफ आसमान और खुला मैदान चुनें ताकि दृश्य बाधित न हो।
प्रकृति पर प्रभाव
ग्रहण के दौरान वातावरण और जीव-जंतुओं पर भी असर दिखाई देता है:
- कई बार पक्षी और जानवर ऐसे व्यवहार करने लगते हैं जैसे रात हो गई हो।
- वातावरण का तापमान गिर जाता है और रोशनी धुंधली हो जाती है।
सांस्कृतिक और ज्योतिषीय महत्व
- हिंदू मान्यताओं में सूर्य ग्रहण को राहु-केतु से जोड़ा जाता है।
- इस बार ग्रहण के समय सूर्य कन्या राशि में रहेगा।
- ज्योतिषियों के अनुसार, यह सिंह, कन्या और मीन राशि वालों पर विशेष असर डाल सकता है।
अगर आप भारत में हैं तो क्या करें?
चूँकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, आप इसे ऐसे अनुभव कर सकते हैं:
- लाइव स्ट्रीम देखें (NASA, TimeandDate, Space.com आदि पर)।
- सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों के जरिए फ़ोटो और वीडियो देखें।
- बच्चों और छात्रों को इसके वैज्ञानिक महत्व के बारे में समझाएँ।
निष्कर्ष
आज का आंशिक सूर्य ग्रहण हमें याद दिलाता है कि हमारा ब्रह्मांड कितना गतिशील और अद्भुत है। यह केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि संस्कृति, ज्योतिष और प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है।
अगर आप उन क्षेत्रों में हैं जहाँ यह दिखाई देगा, तो इसे सुरक्षित तरीक़े से देखें। और अगर नहीं, तो भी ऑनलाइन माध्यम से इस दुर्लभ दृश्य का आनंद ले सकते हैं।